अब मोबाइल कॉल पर दिखेगा कॉलर का असली नाम, TRAI ने दी CNAP सेवा को मंजूरी

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Now the real name of the caller will be visible on mobile calls, TRAI has approved CNAP service.
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inlive247 Desk: अनजान नंबर से आने वाली कॉल्स की चिंता अब खत्म होने वाली है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कॉल करने वाले का नाम दिखाने वाली Calling Name Presentation (CNAP) सेवा को मंजूरी दे दी है. इस सुविधा के तहत अब मोबाइल यूज़र्स को सिर्फ कॉलर का नंबर ही नहीं, बल्कि उसका रजिस्टर्ड नाम भी स्क्रीन पर दिखाई देगा.

क्या है CNAP सेवा?

CNAP (Calling Name Presentation) एक ऐसी तकनीक है जिसके ज़रिए जब कोई व्यक्ति आपको कॉल करेगा, तो आपके मोबाइल पर उस नंबर से जुड़ा रजिस्टर्ड नाम भी नज़र आएगा.

इसका मुख्य उद्देश्य है:

फ्रॉड और स्पैम कॉल्स को रोकना
यूज़र्स को कॉलर की सही पहचान देना
अनचाही कॉल्स से निजात दिलाना

TRAI और DoT का संयुक्त फैसला

28 अक्टूबर 2025 को TRAI ने दूरसंचार विभाग (DoT) की सिफारिशों पर अपनी अंतिम मंजूरी दी. निर्णय के मुताबिक, CNAP सेवा सभी मोबाइल यूज़र्स के लिए डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहेगी.
हालांकि, अगर कोई यूज़र इसे नहीं चाहता तो ऑप्ट-आउट करने का विकल्प उपलब्ध होगा.

इसका मतलब है कि देश के सभी मोबाइल नेटवर्क्स पर यह सेवा अपने आप शुरू होगी और इसके लिए यूज़र्स को कोई अलग प्रक्रिया नहीं करनी होगी.

किन नेटवर्क्स पर शुरू होगी?

शुरुआत में 4G और 5G नेटवर्क्स पर CNAP लागू किया जाएगा.
2G और 3G नेटवर्क्स पर इसे तकनीकी अपग्रेड के बाद उपलब्ध कराया जाएगा.
साथ ही, नए मोबाइल डिवाइसों में CNAP सपोर्ट को अनिवार्य करने की तैयारी है.

CNAP से क्या होंगे फायदे?

  1. फ्रॉड कॉल्स में कमी: फर्जी नंबर या नकली कॉलर से धोखा खाने की संभावना घटेगी.
  2. सुरक्षा में बढ़ोतरी: यूज़र कॉलर का नाम देखकर तय कर सकेगा कि कॉल उठानी है या नहीं.
  3. बिजनेस कॉल्स में पारदर्शिता: कंपनियाँ अपने असली ब्रांड नाम से कॉल करेंगी, जिससे ग्राहक का भरोसा बढ़ेगा.

किन्हें करनी होगी तैयारी?

TRAI के निर्देश के बाद अब टेलीकॉम कंपनियों और मोबाइल निर्माताओं को अपने सिस्टम में तकनीकी बदलाव करने होंगे.
सरकार जल्द ही इसके लिए अंतिम दिशा-निर्देश और समयसीमा जारी करेगी.

गोपनीयता पर सवाल

कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि कॉलर का नाम दिखाने से गोपनीयता पर असर पड़ सकता है. हालांकि TRAI ने स्पष्ट किया है कि नाम की जानकारी केवल टेलीकॉम नेटवर्क के डेटाबेस से ली जाएगी, किसी थर्ड पार्टी ऐप या बाहरी स्रोत से नहीं.

TRAI का यह फैसला भारत में मोबाइल सुरक्षा और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. आने वाले महीनों में इसके पूरी तरह लागू होने के बाद, यूज़र्स को हर कॉल पर कॉलर की असली पहचान दिखेगी. बिल्कुल Truecaller जैसी, लेकिन अब सरकारी और भरोसेमंद रूप में.

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