मार्च में कब है पहला प्रदोष व्रत? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

5 Min Read
एआई इमेज
Spread the love

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद फलदायी होता है. खासकर जब सोमवार और प्रदोष व्रत का संयोग हो, तो फिर यह अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. अलग-अलग वार पर पड़ने वाले प्रदोष व्रत का महत्व भी अलग होता है. मार्च महीने में भी दो बार प्रदोष व्रत रखा जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस महीने का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा.

प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत प्रत्येक शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है. इस दिन सूर्यास्त और रात्रि के बीच का समय प्रदोष काल कहलाता है, जिसमें भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है.

कहा जाता है कि सबसे पहले इस व्रत को चंद्र देव ने किया था. मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. साथ ही इस व्रत को करने से भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं.

मार्च का पहला प्रदोष व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत 16 मार्च 2026 को रखा जाएगा. इस दिन सोमवार होने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस व्रत को पूरे नियम और श्रद्धा के साथ रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द भी बढ़ता है.

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 16 मार्च को सुबह 9:40 बजे से होगी. वहीं इस तिथि का समापन 17 मार्च को सुबह 9:23 बजे होगा. प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है.

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे हल्के रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें और जलाभिषेक करें. श्रद्धालु पूरे दिन फलाहार करते हुए व्रत रख सकते हैं.

चूंकि इस व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में होती है, इसलिए शाम को पूजा से पहले दोबारा स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें, उन्हें भोग अर्पित करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें. अंत में शिव जी की आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें.

प्रदोष व्रत पर करें ये उपाय

पापों से मुक्ति के लिए: प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर तिल अर्पित करें. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: इस दिन शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं.

खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए: प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को दही में शहद मिलाकर भोग लगाएं. ऐसा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है.

विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए: अगर विवाह में किसी तरह की अड़चन आ रही है, तो प्रदोष व्रत के दिन स्नान के बाद भगवान शिव के सामने बैठकर “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का 11 बार जप करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें. मान्यता है कि इससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *