23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय

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Shattila Ekadashi 2026 Makar Sankranti: इस वर्ष 14 जनवरी को एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, करीब 23 वर्षों के बाद षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति एक ही दिन पड़ रही है. इससे पहले ऐसा शुभ संयोग साल 2003 में बना था. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि शाम 05 बजकर 52 मिनट तक रहेगी.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, जप, तप, दान और श्राद्ध-तर्पण का विशेष महत्व होता है. मकर संक्रांति और एकादशी का एक साथ आना इसे अक्षय फल प्रदान करने वाला बनाता है. खास बात यह है कि इस बार षटतिला एकादशी के दिन वृद्धि योग, लाभ दृष्टि योग और शुक्रादित्य योग जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं. ऐसे में यह दिन पूजा-पाठ और दान के लिए बेहद फलदायी माना जा रहा है.

षटतिला एकादशी पर बनने वाले शुभ योग

इस दिन सुबह 07 बजकर 57 मिनट से वृद्धि योग का आरंभ होगा. वहीं सूर्योदय से लेकर 15 जनवरी को सुबह 03 बजकर 03 बजे तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा. इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है, जो कार्यों में सफलता प्रदान करता है.

पूजा के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 15 मिनट से 02 बजकर 57 मिनट तक

अमृत काल: दोपहर 3 बजकर 23 मिनट से शाम 05  बजकर 10 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 43 मिनट से 06 बजकर 10 मिनट तक

निशिता मुहूर्त: सुबह 12 बजकर 03 मिनट से 12  बजकर 57 मिनट तक (15 जनवरी)

षटतिला एकादशी की पूजा विधि

सुबह स्नान कर मंदिर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें. सबसे पहले गणेश जी को प्रणाम कर सूर्य देव की पूजा करें. इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें और पंचामृत तथा गंगाजल से अभिषेक करें. प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं.

यदि संभव हो तो व्रत का संकल्प लें और षटतिला एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें. इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें और तुलसी दल सहित भोग अर्पित करें. अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें.

भोग क्या लगाएं

इस दिन भगवान विष्णु को तिल, गुड़, चने की दाल, केला या पंचामृत का भोग अर्पित किया जा सकता है. भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें. सूर्य देव को भी तिल और गुड़ का भोग लगाना शुभ माना जाता है.

मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नारायणाय लक्ष्म्यै नमः

विशेष उपाय

जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ें, तो श्री विष्णु चालीसा और सूर्य चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस दिन मंत्र जाप करने से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

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