निपाह वायरस: पश्चिम बंगाल में मिले दो संदिग्ध, अलर्ट मोड पर झारखंड, जानें कैसा फैलता है संक्रमण

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निपाह वायरस: पश्चिम बंगाल में मिले दो संदिग्ध, अलर्ट मोड पर झारखंड, जानें कैसा फैलता है संक्रमण
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Nipah Virus Jharkhand: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामलों की खबर सामने आते ही झारखंड में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने मंगलवार को बताया कि एहतियात के तौर पर सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं. इसके साथ ही निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है और किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है.

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, सरकार केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करने पर भी खास जोर दिया जा रहा है. राज्यभर में जन जागरूकता अभियानों को तेज किया जा रहा है, ताकि आम लोग निपाह वायरस के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें और समय रहते जरूरी सावधानियां बरत सकें. उनका कहना है कि सही समय पर सतर्कता अपनाकर इस गंभीर बीमारी के संभावित खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि झारखंड सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

बता दें पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के एक निजी अस्पताल में काम करने वाली दो नर्सों में निपाह वायरस से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं. दोनों की उम्र 26 से 27 वर्ष के बीच बताई जा रही है. फिलहाल उन्हें निगरानी में रखा गया है और जांच की प्रक्रिया जारी है.

क्या हैं निपाह वायरस के लक्षण?

निपाह वायरस का संक्रमण अक्सर हल्के बुखार और सिरदर्द से शुरू होता है. इसके बाद सांस लेने में परेशानी, खांसी, गले में खराश और तेज सिरदर्द जैसे लक्षण उभर सकते हैं. गंभीर स्थिति में यह वायरस मस्तिष्क पर असर डालता है, जिससे ब्रेन अटैक या एंसेफेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन की समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में मरीज कोमा में भी जा सकता है.

कैसे फैलता है निपाह वायरस?

निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों के संपर्क से फैलता है, जिन्हें फ्लाइंग फॉक्स कहा जाता है. इसके अलावा सूअर और कुछ अन्य घरेलू जानवर भी इस वायरस के वाहक हो सकते हैं. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी यह बीमारी फैल सकती है. निपाह वायरस को बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है. यानी हर दो से तीन संक्रमित मरीजों में से एक की जान को चेतावनी का खतरा बना रहता है.

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