नगर निकाय चुनाव से पहले सियासी संग्राम तेज! बीजेपी ने की केंद्रीय बल तैनाती की मांग, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

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Ranchi: झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू के नेतृत्व में पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयुक्त से मिला. प्रतिनिधिमंडल ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा. साथ ही राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी उठाए. उनका कहना था कि मौजूदा हालात में निष्पक्ष चुनाव को लेकर आशंका बनी हुई है. ज्ञापन में संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती, मतपेटियों के स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई. इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे.

राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त: आदित्य साहू

आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है और सत्ताधारी गठबंधन के संरक्षण में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रांची सिविल कोर्ट और डीसी कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, जमशेदपुर और रांची में फायरिंग की घटनाएं और बच्चों के लापता होने जैसे मामले मौजूदा स्थिति को उजागर करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन कई मामलों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहा, जिससे आम लोगों में भय का माहौल है.

बूथ कैप्चरिंग और प्रशासनिक दुरुपयोग की आशंका

प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में बताया कि 23 फरवरी को राज्य के 48 नगर निकायों के 1087 वार्डों और 4304 बूथों पर मतदान होना है. यह चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाएगा. ऐसे में बूथ कैप्चरिंग और प्रशासनिक दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए बीजेपी ने संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की है. साथ ही मतपेटियों के संग्रह स्थल और मतगणना केंद्रों पर भी केंद्रीय बलों की निगरानी सुनिश्चित करने की बात कही गई है. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है और इसे सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है.

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