अब सोशल मीडिया पर छुपाये नहीं छुपेगा AI कंटेंट, 3 घंटे में हटाने होंगे भ्रामक पोस्ट

4 Min Read
एआई सांकेतिक तस्वीर
Spread the love

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते डीपफेक और भ्रामक AI कंटेंट को रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. नए आदेश के तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों को AI द्वारा बनाए गए हर कंटेंट पर क्लियर और प्रमुख लेबल लगाना अनिवार्य होगा. ये नियम 20 फरवरी से लागू होंगे और इससे सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी. ऐसे में अब केवल “AI” टैग लगाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि हर प्लेटफॉर्म को क्लियर लेबल और मेटाडेटा जोड़ना होगा, जिससे कोई भी व्यक्ति एक नजर में पहचान सके कि कंटेंट असली है या एआई. यह कदम डिजिटल कानूनों में बड़े संशोधन का हिस्सा है और इसका उद्देश्य लोगों को फर्जी और ऑरिजिनल कंटेंट के बीच स्पष्ट अंतर समझने में मदद करना है.

IT नियम 2021 में संशोधन

समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने Information Technology Rules, 2021 में संशोधन का मसौदा तैयार किया है. इन नियमों के तहत:

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना होगा.
  • अवैध और भ्रामक AI कंटेंट को रोकने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करना होगा.
  • आपत्तिजनक कंटेंट को फ्लैग होने के 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा.
  • AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए नए अनिवार्य नियम

सरकार द्वारा तय किए गए प्रमुख प्रावधान

स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा जरूरी: किसी भी AI-जनरेटेड कंटेंट पर स्पष्ट लेबल होना चाहिए. उसमें एम्बेडेड मेटाडेटा भी जोड़ा जाएगा, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि कंटेंट एआई से बना है. प्लेटफॉर्म इन टैग्स को छिपाने या हटाने की अनुमति नहीं दे सकते.

विजुअल और ऑडियो के लिए विशेष शर्तें: फोटो या इमेज पर लेबल कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से को कवर करे. ऑडियो या वीडियो क्लिप में लेबल पहले 10 प्रतिशत भाग में दिखाई देना चाहिए. इससे दर्शकों को अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि कंटेंट असली है या नहीं.

3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट: यदि कोई पोस्ट अवैध या भ्रामक पाई जाती है और उसे फ्लैग किया जाता है, तो उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा.

अतिरिक्त सुरक्षा उपाय

सरकार ने प्लेटफॉर्म्स पर और भी सख्त जिम्मेदारियां डाली हैं. जैसे कि-

  • यूजर्स से पूछा जाएगा कि वे जो कंटेंट अपलोड कर रहे हैं, वह असली है या AI-जनरेटेड.
  • प्लेटफॉर्म अपने तकनीकी टूल्स से इन दावों की जांच करेंगे.
  • ऑटोमेटेड सिस्टम अवैध या भ्रामक AI कंटेंट की पहचान कर उसे वायरल होने से पहले रोकेंगे.
  • हर तीन महीने में यूजर्स को नियम उल्लंघन की सजा के बारे में रिमाइंडर दिया जाएगा.

प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर असर

यह नियम उन सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा जैसे:

  • Facebook
  • Instagram
  • YouTube
  • X

डीपफेक घटनाओं के बाद सख्ती

हाल के समय में कई हाई-प्रोफाइल डीपफेक वीडियो और ऑडियो सामने आए, जिनका इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया. वहीं, अगले वर्ष बिहार में होने वाले चुनावों को देखते हुए Election Commission of India ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है, कि वे किसी भी AI-निर्मित प्रचार कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करें.

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *