रांची में विकसित भारत बजट पर संवाद, डॉ गौरव वल्लभ व संजय सेठ ने साझा किया विजन

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डॉ गौरव वल्लभ व संजय सेठ ने साझा किया विजन
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Ranchi: झारखंड दौरे पर आए प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य और देश के जाने-माने आर्थिक चिंतक प्रो. डॉ. गौरव वल्लभ व रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने सोमवार को रांची में आयोजित ‘विकसित भारत बजट’ विषय पर चर्चा में अपने विचार रखे. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प से देश की जनता पूरी तरह जुड़ी हुई है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब राज्य विकसित होंगे. उनके मुताबिक, “विकसित झारखंड ही विकसित भारत की मजबूत नींव बन सकता है.” उन्होंने याद दिलाया कि कभी झारखंड के बड़े शहर एमएसएमई गतिविधियों के केंद्र हुआ करते थे, लेकिन आज उनकी हालत चिंताजनक है.

प्रो. वल्लभ ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं है. इसमें बेहतर जीवन स्तर, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सोच में सकारात्मक बदलाव भी शामिल है.

एमएसएमई के बिना विकास अधूरा

एमएसएमई सेक्टर पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए डी-रेगुलेशन बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि उद्योगों को सिर्फ सूचना देकर काम शुरू करने की सुविधा मिलनी चाहिए, न कि विभागों के चक्कर काटने पड़ें. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद हाई डी-रेगुलेशन के समर्थक हैं. एमएसएमई क्षेत्र को सबसे ज्यादा जरूरत पर्याप्त पूंजी और अल्पकालिक लिक्विडिटी सपोर्ट की है. मौजूदा बजट में केंद्र सरकार ने 12,000 करोड़ रुपये के इक्विटी सपोर्ट की घोषणा की है. उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकारों को भी इसी तरह का सहयोग देना चाहिए. बजट में एमएसएमई के लिए लिक्विडिटी और मार्केटिंग सपोर्ट के साथ-साथ माइक्रो यूनिट्स को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए ‘कॉर्पोरेट मित्र’ की व्यवस्था भी की गई है.

प्रो. वल्लभ ने बताया कि आज देश में एमएसएमई क्षेत्र लगभग 12 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. वैश्विक तनावों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है. जनधन खातों के जरिए वित्तीय समावेशन को मजबूती मिली है. पिछले 10 वर्षों में 40 करोड़ से ज्यादा लोगों को 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मुद्रा ऋण दिया गया है. साथ ही उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे.

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