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यूके मंत्री से मिले सीएम हेमंत सोरेन, शिक्षा से लेकर क्लाइमेट तक कई अहम मुद्दों पर की बातचीत

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CM Hemant Soren UK Visit: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार को आधिकारिक दौरे पर यूनाइटेड किंगडम पहुंचे. इस दौरान उन्होंने यूके सरकार की पार्लियामेंटरी अंडर सेक्रेटरी फॉर इक्वलिटी एंड इंडो-पैसिफिक मामलों की मंत्री सीमा मल्होत्रा से मुलाकात की. बैठक में शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, रिस्पॉन्सिबल माइनिंग, क्लाइमेट चेंज, संस्कृति और हेरिटेज संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने झारखंड और यूके के बीच दीर्घकालिक और व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.

शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर बनेगा ठोस एक्शन प्लान

बैठक में ओवरसीज स्टडी, करियर गाइडेंस, इंटर्नशिप, लीडरशिप डेवलपमेंट और पब्लिक सर्विस एक्सपीरियंस से जुड़े कार्यक्रमों को आपस में जोड़ने के लिए एक स्पष्ट एक्शन प्लान तैयार करने पर सहमति बनी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के युवाओं को वैश्विक स्तर के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है. यूके सरकार ने झारखंड की मरांग गोमके जयपाल मुंडा फॉरेन स्कॉलरशिप स्कीम और Chevening Scholarship–मरांग गोमके जयपाल मुंडा स्कॉलरशिप की सराहना करते हुए इन्हें भारत–यूके सहयोग का सशक्त उदाहरण बताया. बताया गया कि बीते चार वर्षों में इन योजनाओं के जरिए 100 से अधिक छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा का लाभ मिल चुका है.

यूनिवर्सिटीज और स्किल संस्थानों के साथ साझेदारी पर चर्चा

बैठक में यूके की प्रमुख यूनिवर्सिटीज, स्किल और एलिजिबिलिटी संस्थानों के साथ संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार हुआ. माइनिंग टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट स्टडीज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम, शिक्षकों के आदान-प्रदान और ट्रेनिंग रूट विकसित करने पर जोर दिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के तकनीकी संस्थान अगर यूके की यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर काम करें, तो राज्य के छात्रों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और रिसर्च के अवसर मिलेंगे, जिससे राज्य की मानव संसाधन क्षमता को मजबूती मिलेगी.

रिस्पॉन्सिबल माइनिंग और क्रिटिकल मिनरल्स पर खास फोकस

इकोनॉमी और क्लाइमेट सहयोग को लेकर मुख्यमंत्री ने रिस्पॉन्सिबल माइनिंग के क्षेत्र में यूके की विशेषज्ञता के साथ करीबी सहयोग का प्रस्ताव रखा. इसमें पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक मानकों को मजबूत करने, माइंस की मॉनिटरिंग, सुरक्षा व्यवस्था, क्लीन प्रोसेसिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी के उपयोग जैसे विषय शामिल हैं. इसके साथ ही रिस्पॉन्सिबल क्रिटिकल मिनरल्स पर झारखंड–यूके वर्किंग ट्रैक स्थापित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई. इसका उद्देश्य स्टैंडर्ड मजबूत करना, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इनोवेशन और सप्लाई चेन सहयोग को बढ़ावा देना है. इस पहल को झारखंड को भविष्य की ग्रीन इकोनॉमी के लिए तैयार करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

कोल सेक्टर के लिए ट्रांजिशन फाइनेंस पर जोर

बैठक में यूके की क्लाइमेट और फाइनेंशियल संस्थाओं के साथ मिलकर झारखंड के कोल सेक्टर के डायवर्सिफिकेशन, क्लाइमेट एडॉप्टेशन, श्रमिकों और स्थानीय समुदायों के समर्थन के लिए ट्रांजिशन फाइनेंस स्ट्रक्चर विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ. मुख्यमंत्री ने झारखंड को जस्ट ट्रांजिशन प्रोग्राम के लिए पायलट राज्य के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा.

संस्कृति और हेरिटेज संरक्षण में भी सहयोग

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि संस्कृति, खेल और विरासत संरक्षण लोगों के बीच सीधे संपर्क और रिश्तों को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हैं. उन्होंने भारत–यूके हेरिटेज प्रीजर्वेशन एग्रीमेंट के तहत झारखंड के मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण में यूके से सहयोग का अनुरोध किया.

इन ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO से मान्यता दिलाने की दिशा में भी संयुक्त प्रयासों पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की प्राचीन विरासत न केवल राज्य, बल्कि पूरी मानव सभ्यता की साझा धरोहर है और इसका संरक्षण बेहद जरूरी है.

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