12 मार्च को झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव, 25 हजार से ज्यादा अधिवक्ता करेंगे मतदान

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झारखंड स्टेट बार काउंसिल
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झारखंड स्टेट बार काउंसिल के पंचवर्षीय चुनाव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं. राज्यभर के अधिवक्ता 12 मार्च को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इस दिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान कराया जाएगा. चुनाव के लिए राज्य के 37 जिला और अनुमंडलीय बार एसोसिएशन में मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां अधिवक्ता बैलेट पेपर के माध्यम से वोट डालेंगे.

75 मतदान केंद्रों पर होगी वोटिंग

चुनाव को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए कुल 75 मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं. जिन बार एसोसिएशन में मतदाताओं की संख्या 500 से अधिक है, वहां दो बैलेट बॉक्स रखे जाएंगे. मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ के अनुसार चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और बैलेट बॉक्स जिलों में भेजे जा चुके हैं. मतदान प्रक्रिया को संचालित करने के लिए 75 पीठासीन पदाधिकारियों की तैनाती की जाएगी, जबकि प्रत्येक बार एसोसिएशन में एक पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया जाएगा.

पहचान पत्र दिखाकर डाल सकेंगे वोट

मतदान के दौरान अधिवक्ताओं को पहचान पत्र दिखाकर ही वोट डालने की अनुमति दी जाएगी. राजधानी रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट परिसर में 10 मतदान बूथ बनाए जाएंगे. इसके अलावा रांची और धनबाद जिला बार एसोसिएशन में आठ-आठ बूथ, बोकारो और गिरिडीह में तीन-तीन बूथ, हजारीबाग में चार बूथ तथा जमशेदपुर में पांच बूथ बनाए जाएंगे. अन्य जिलों के बार एसोसिएशन में भी जरूरत के अनुसार मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं.

23 पदों के लिए होगा चुनाव

स्टेट बार काउंसिल के कुल 25 सदस्यीय पदों में से 23 पदों पर चुनाव कराया जा रहा है. इन सीटों के लिए कुल 100 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 75 पुरुष और 25 महिला प्रत्याशी शामिल हैं. मतदान के जरिए 18 पुरुष और पांच महिला सदस्यों का चयन किया जाएगा. इस चुनाव में राज्य के करीब 25,001 अधिवक्ता मतदाता के रूप में हिस्सा लेंगे और अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे. वहीं, महिला सदस्यों के दो पद मनोनयन के आधार पर भरे जाएंगे.

महिला अधिवक्ताओं के लिए पहली बार आरक्षण

इस बार के चुनाव में महिला अधिवक्ताओं के लिए विशेष प्रावधान भी किया गया है. पहली बार झारखंड स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं के लिए कुल सात सीटें आरक्षित की गई हैं. इनमें से पांच सीटों पर चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधि चुने जाएंगे, जबकि दो सीटें मनोनयन के जरिए भरी जाएंगी. इस व्यवस्था को बार काउंसिल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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