शराब घोटाले में झारखंड पुलिस की बड़ी चूक! बच निकला किंगपिन, एक्शन में ACB, पूरी टीम को किया सस्पेंड

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Ranchi: शराब घोटाले के एक बड़े मामले में झारखंड पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है. छत्तीसगढ़ का शराब कारोबारी और घोटाले का मुख्य आरोपी भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया. उसे गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम खाली हाथ लौट आई. यही नहीं, इसी मामले के एक अन्य अहम आरोपी नवीन केडिया को दोबारा गिरफ्तार करने का निर्देश भी दिया गया था, लेकिन वह भी पुलिस की पकड़ से बाहर निकलने में कामयाब रहा.

मामले की जानकारी मिलते ही ACB की चीफ ADG प्रिया दुबे ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए. जांच में पुलिस की गंभीर लापरवाही उजागर होने के बाद पूरी टीम को निलंबित कर दिया गया है. बता दें कि भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ‘भाटिया वाइंस एंड कंपनी’ का मालिक है और ACB ने जांच के बाद उसे इस केस में अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया है.

आरोपियों को भागने का मौका कैसे मिला?

ACB चीफ ADG प्रिया दुबे के निर्देश पर जब एसीबी अधिकारियों ने जांच शुरू की, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं. जांच में पाया गया कि अगर पुलिस टीम ने छापेमारी ठीक से की होती, तो आरोपी आसानी से गिरफ्तार किए जा सकते थे. लेकिन छापेमारी के दौरान टीम ने अपने कर्तव्यों को गंभीरता से नहीं निभाया, जिसका फायदा उठाकर आरोपी फरार हो गए.

किसके नेतृत्व में गई थी टीम?

झारखंड पुलिस की यह टीम सब-इंस्पेक्टर (SI) गगन कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ गई थी. उनके साथ दो आरक्षी-सत्येंद्र कुमार और प्रभाकर भी शामिल थे. तीनों रांची जिला पुलिस बल से हैं. रांची पुलिस ने अतिरिक्त बल की मांग पर इन्हें ACB को उपलब्ध कराया था. गौरतलब है कि भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ने पहले ही अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था.

नवीन केडिया मामले में पहले ही हो चुकी है कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, इससे पहले नवीन केडिया के मामले में भी ACB ने इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था. निलंबित अधिकारियों में इंस्पेक्टर विजय केरकेट्टा, सब-इंस्पेक्टर राहुल और शशिकांत, ASI राजू और चार अन्य आरक्षी शामिल थे.

निगरानी में भी फेल रही पुलिस

इन सभी अधिकारियों और जवानों को नवीन केडिया की ट्रांजिट बेल के दौरान उसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन आरोप है कि निगरानी के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई. नतीजा यह हुआ कि ट्रांजिट बेल की अवधि खत्म होने के बाद सरेंडर करने के बजाय नवीन केडिया फरार हो गया. इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं ACB की सख्त कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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