अलकतरा घोटाला केस: सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, अब नियमित सुनवाई का सामना करेंगे विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी
Alaktara Scam Case: अलकतरा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गढ़वा से विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. विशेष न्यायाधीश की अदालत में विधायक सशरीर उपस्थित हुए. अब इस मामले में 20 फरवरी से गवाही की प्रक्रिया शुरू होगी. अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह अपने गवाह पेश करें. अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने दलीलें रखीं.
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
बताया जाता है कि विधायक ने आरोप गठन पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली. इससे पहले वे झारखंड हाईकोर्ट भी पहुंचे थे. दो फरवरी को सुनवाई निर्धारित थी, जिसके बाद छह फरवरी को आरोप तय किए जाने थे. हालांकि, उस दिन हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी और तारीख बढ़ाकर 11 फरवरी कर दी गई.
2009 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
सीबीआई ने वर्ष 2009 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी. आरोप है कि विधायक ने ‘कलावती कंस्ट्रक्शन’ के नाम से छत्तरपुर-जपला सड़क (करीब 32 किमी) निर्माण का ठेका लिया था, जिसकी लागत लगभग सात करोड़ रुपये थी. जांच में यह आरोप सामने आया कि 61 फर्जी बिलों के जरिये 1200 मीट्रिक टन अलकतरा की आपूर्ति दिखाकर करीब 2.24 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई. इसी प्रकरण में वर्ष 2012 में विधायक को जेल भी जाना पड़ा था.
अब आगे की प्रक्रिया
आरोप तय होने के बाद मामला नियमित ट्रायल की ओर बढ़ेगा. गवाही के दौरान अभियोजन पक्ष को दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होंगे. वहीं, बचाव पक्ष जिरह के माध्यम से इन साक्ष्यों को चुनौती देगा. ट्रायल पूरा होने के बाद अंतिम बहस होगी और फिर अदालत फैसला सुनाएगी. यदि दोष सिद्ध होता है, तो सजा के साथ-साथ जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उनकी सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है.

