दिल्ली की आबकारी नीति मामले में अदालत से राहत मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया भावनात्मक रही. फैसले के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि उन पर लगाया गया पूरा मामला बेबुनियाद था और इसे राजनीतिक मकसद से खड़ा किया गया.
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उनके और उनकी पार्टी को कमजोर करने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई. उनका कहना था कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र था, जिसका मकसद आम आदमी पार्टी को खत्म करना था. उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब उनके इशारे पर हुआ.
केजरीवाल का बड़ा हमला
वहीं, अदालत से राहत मिलने के बाद पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि दिल्ली में दोबारा चुनाव कराए जाएं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देता हूं कि दिल्ली में फिर से चुनाव कराएं. अगर बीजेपी 10 से ज्यादा सीटें जीत लेती हैं, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा.” उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को देश से माफी मांगनी चाहिए. केजरीवाल के अनुसार, अदालत ने इस मामले को पूरी तरह झूठा और मुकदमे के लायक नहीं माना है.
साजिश का आरोप, खुद को बताया ‘कट्टर ईमानदार’
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उनके और उनकी पार्टी के खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई. उन्होंने कहा, “हम कट्टर ईमानदार हैं.” उन्होंने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए अपने समर्थकों का धन्यवाद किया और कहा कि सच की जीत हुई है.
दिल्ली के मुद्दों पर भी साधा निशाना
केजरीवाल ने बीजेपी सरकार पर दिल्ली की समस्याओं को लेकर भी हमला बोला. उनका कहना था कि बीजेपी ने दिल्ली को प्रदूषण, गंदी यमुना और खराब सड़कों जैसी परेशानियों में धकेल दिया है. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कारण राजधानी में अव्यवस्था बढ़ी है.
अदालत में क्या हुआ?
शुक्रवार को दिल्ली की विशेष अदालत ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया. अदालत ने कहा कि सीबीआई यह साबित नहीं कर पाई कि इस नीति के पीछे कोई बड़ी साजिश या आपराधिक मंशा थी.
सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया. अदालत का कहना था कि जांच एजेंसी का मामला ठोस सबूतों पर आधारित नहीं दिखता. आदेश में कहा गया कि साजिश की कहानी अनुमान पर ज्यादा और पुख्ता साक्ष्यों पर कम टिकी हुई थी.
