Inlive247 Desk: झारखंड में हो रहे निकाय चुनावों के बीच सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. भले ही ये चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन लगभग हर राजनीतिक दल ने अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है. विधानसभा चुनाव के बाद अब शहरों की सत्ता पर कब्जा जमाने की जंग छिड़ी हुई है और सभी दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं. इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने एक बड़ा राजनीतिक दावा कर हलचल मचा दी है. उन्होंने कहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ मर्ज होने जा रही है. उनका कहना है कि आने वाले 15-20 दिनों में यह तस्वीर साफ हो जाएगी और इस पूरे घटनाक्रम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हरी झंडी भी मिल चुकी है.
निकाय चुनाव के बाद सरकार बदलने का दावा
केएन त्रिपाठी ने दावा किया है कि राज्य की सत्ता में बड़ा फेरबदल होने वाला है. उनके मुताबिक, निकाय चुनाव खत्म होते ही जेएमएम और बीजेपी के बीच गठबंधन हो जाएगा और प्रदेश में एनडीए की सरकार बन सकती है. उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच ‘डील’ फाइनल हो चुकी है और जेएमएम अब पूरी तरह बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रही है. त्रिपाठी का दावा है कि निकाय चुनाव के बाद इसकी औपचारिक घोषणा भी हो सकती है. उनके बयान ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है.
बीजेपी ने किया साफ इनकार
कांग्रेस नेता के इन दावों पर बीजेपी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस तरह की किसी भी संभावना से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी फिलहाल आगामी चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है और इस तरह की बातों का कोई आधार नहीं है. साथ ही उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक साल पूरा होने के बावजूद सरकार की कोई ठोस उपलब्धि नजर नहीं आती. मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड की जनता को सिर्फ सपने दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है. उनका कहना है कि जब सरकार की प्राथमिकता निजी लाभ होगी, तो सरकारी खजाना खाली होना तय है और विकास कार्य प्रभावित होंगे.
आखिर सच्चाई क्या है?
फिलहाल झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम, कांग्रेस, राजद और वामदलों की गठबंधन सरकार चल रही है. हालांकि सहयोगी दलों के बीच मतभेद की खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं. इसकी शुरुआत बिहार चुनाव के समय से मानी जाती है. उस दौरान जेएमएम महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन राजद ने उसे एक भी सीट नहीं दी. इसके बाद से राजनीतिक रिश्तों में खटास की चर्चा तेज हो गई थी.
यह भी कहा जा रहा है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मंच पर कांग्रेस और राजद के विधायकों को जगह नहीं दी जा रही है, जिससे अटकलों को और बल मिल रहा है. अब सवाल यह है कि क्या वाकई निकाय चुनाव के बाद झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा, या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी है? आने वाले 15-20 दिन इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं.
