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रांची यूनिवर्सिटी में बड़ा विवाद: कुलपति और CVS अधिकारियों पर गंभीर आरोप, पूर्व सीनेट सदस्य डॉ अटल पांडेय ने कुलाधिपति को सौंपा ज्ञापन

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Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के पूर्व सीनेट सह सिंडीकेट सदस्य डॉ. अटल पाण्डेय ने सोमवार को लोकभवन, रांची में कुलाधिपति के नाम एक ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कुलपति डॉ. धर्मेन्द्र कुमार सिंह, सेंटर फॉर वोकेशनल स्टडीज (CVS) के निदेशक डॉ. मुकुंद मेहता और सह-निदेशक डॉ. स्मृति सिंह पर मनमानी फैसलों का आरोप लगाते हुए कहा कि इनके कारण छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

डॉ. पाण्डेय ने बताया कि 10 जनवरी 2026 को रांची विश्वविद्यालय के IQAC में एक बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कुलपति ने ऑनलाइन माध्यम से की. इस बैठक में जल्दबाजी और बिना अधिकार के ग्रामीण विकास पाठ्यक्रम को बंद करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया. जबकि विश्वविद्यालय में किसी भी पाठ्यक्रम को शुरू करने या बंद करने के लिए सीनेट, सिंडीकेट, एकेडमिक काउंसिल सहित तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है.

उन्होंने कहा कि वर्तमान कुलपति प्रभारी कुलपति हैं, जिनका कार्यक्षेत्र केवल दैनिक प्रशासनिक कार्यों तक सीमित होना चाहिए. इसके बावजूद उन्होंने एक बड़े नीतिगत फैसले को एकेडमिक काउंसिल को दरकिनार करते हुए मंजूरी दे दी, जो नियमों के खिलाफ है.

इतना ही नहीं, बैठक में पूर्व स्थायी कुलपति के दो अहम फैसलों को भी पलट दिया गया. पहला फैसला जुलाई 2024 से अतिथि शिक्षकों को प्रति क्लास 700 रुपये देने से जुड़ा था, जिसे घटाकर 500 रुपये प्रति क्लास कर दिया गया. दूसरा फैसला ग्रामीण विकास पाठ्यक्रम को इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में स्थानांतरित करने से संबंधित था, जिसे पूरी तरह रद्द कर दिया गया. ये दोनों निर्णय पहले CVS की कोर कमेटी में लिए गए थे, लेकिन प्रभारी कुलपति ने इन्हें एक झटके में खत्म कर दिया.

पूर्व सीनेट सदस्य ने पूरे मामले में दुर्भावना और गलत मंशा की आशंका जताते हुए कुलाधिपति से जांच की मांग की है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया है.

मीडिया से बातचीत में डॉ. अटल पाण्डेय ने कहा कि कुलपति और CVS के अधिकारी अकर्मण्यता की सारी सीमाएं पार कर चुके हैं. उनके फैसलों का सीधा असर झारखंड के जनजातीय, पिछड़े, गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों पर पड़ेगा, जो XISS जैसे महंगे संस्थानों की फीस नहीं चुका सकते.

उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास पाठ्यक्रम एक रोजगारोन्मुखी कोर्स है, जिससे पढ़कर छात्र भारत सरकार, झारखंड सरकार, एनजीओ और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में नौकरी पाते हैं. लेकिन कुलपति की अदूरदर्शिता और CVS निदेशक डॉ. मुकुंद चन्द्र मेहता व डॉ. स्मृति सिंह की मनमानी के कारण यह पाठ्यक्रम आज बंद होने की कगार पर है.

डॉ. पाण्डेय ने यह भी आरोप लगाया कि CVS के निदेशक और सह-निदेशक पिछले छह वर्षों से अधिक समय से अपने पदों पर बने हुए हैं और उनके कार्यकाल में कई पाठ्यक्रम बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य बंद होने की स्थिति में हैं. शिक्षकों और कर्मचारियों ने इन अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर कुलपति को कई बार जानकारी दी, लेकिन उन्हें हटाने में कोई रुचि नहीं दिखाई गई. इससे कुलपति और CVS अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका और गहराती है.

सबसे गंभीर आरोप यह है कि वोकेशनल फंड में करोड़ों रुपये होने के बावजूद पिछले सात महीनों से शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन रोका गया है. आरोप है कि अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों को धमकाया भी जा रहा है.

डॉ. अटल पाण्डेय ने कहा कि ऐसे अधिकारी कभी छात्र हितैषी नहीं हो सकते. उन्होंने मांग की कि इनसे तुरंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां छीनी जाएं और इनके पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.

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