61 दिन बाद घर लौटा लापता कन्हैया, रांची पुलिस को मिली बड़ी सफलता
Kanhaiya Kumar Missing Case: राजधानी रांची से सटे ओरमांझी इलाके से लापता हुआ 12 वर्षीय कन्हैया कुमार आखिरकार 61 दिनों के लंबे इंतजार के बाद सकुशल मिल गया है. पुलिस ने उसे कोडरमा जिले के चंदवारा क्षेत्र से बरामद किया है. कन्हैया की सुरक्षित वापसी से जहां परिवार ने राहत की सांस ली है, वहीं इस केस ने एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क की ओर भी इशारा किया है.
ओरमांझी से रहस्यमय तरीके से हुआ था लापता
गौरतलब हो कि कन्हैया कुमार ओरमांझी के शंकर घाट, सिलदिरी गांव का निवासी है, जो करीब दो महीने पहले अचानक लापता हो गया था. वहीं, शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के कारण मामला और भी पेचीदा हो गया, जिसके बाद पुलिस ने झारखंड ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों तक जांच का दायरा बढ़ा दिया था.
61 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद मिली सफलता
बता दें इस संवेदनशील मामले की निगरानी खुद राकेश रंजन कर रहे थे. उनके निर्देशन में गठित एसआईटी ने तकनीकी सर्विलांस, खुफिया इनपुट और जमीनी जांच के जरिए आखिरकार कन्हैया तक पहुंचने में सफलता हासिल की. लगातार दबिश और सूचनाओं के सत्यापन ने इस ऑपरेशन को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया. कोडरमा के चंदवारा इलाके में स्थानीय थाना पुलिस की टीम ने विशेष छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें कन्हैया को सकुशल बरामद कर लिया गया. इस बात की आधिकारिक पुष्टि कोडरमा एसपी अनुदीप सिंह ने की है.
कई राज्यों तक फैली थी जांच की जद
वहीं, कन्हैया की तलाश में पुलिस ने जांच को सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सिल्ली, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और पलामू के साथ-साथ बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में भी संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई. पुलिस को शक है कि यह मामला अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह से जुड़ा हो सकता है.
यूपी के मिर्जापुर गिरोह से जुड़े संकेत
बता दें जांच के दौरान यूपी के मिर्जापुर से सक्रिय मानव तस्कर गिरोह का नाम सामने आया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, इसी नेटवर्क का जिक्र पहले धुर्वा से लापता अंश-अंशिका मामले में भी हुआ था. उसी केस में हुई गिरफ्तारी और पूछताछ से मिले इनपुट ने कन्हैया केस को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई.
वहीं, पुलिस ने सिल्ली थाना क्षेत्र के टूटकी गांव और रामगढ़ इलाके में कई लोगों से पूछताछ की. कुछ स्थानीय लोगों पर तस्करों के लिए संपर्क सूत्र की भूमिका निभाने का शक जताया जा रहा है. एसआईटी को आशंका है कि बिना स्थानीय सहयोग के इतने बड़े नेटवर्क का संचालन संभव नहीं.

