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फरवरी में लगेगा साल का पहला सूर्यग्रहण, भारत में कितना पड़ेगा असर? जानिए सूतक काल की पूरी जानकारी

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Surya Grahan 2026: फरवरी महीने में साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे लेकर खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रहण राहु और केतु के प्रभाव से बनता है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है. ऐसे में इस सूर्य ग्रहण का भारत पर क्या प्रभाव होगा, क्या सावधानियां रखनी चाहिए और यह कहां दिखाई देगा, इस बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री ने जानकारी दी है.

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को पड़ेगा. पंचांग के मुताबिक यह ग्रहण फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगेगा. हालांकि इसका असर भारत में नहीं माना जाएगा, क्योंकि यह सूर्य ग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा. इसी वजह से न तो सूतक काल मान्य होगा और न ही पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक कार्यों पर कोई रोक लगेगी. भारत के अलावा यह ग्रहण दुनिया के कई अन्य देशों में दिखाई देगा, जहां सूतक काल लागू रहेगा.

किन-किन जगहों पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

आचार्य बताते हैं कि यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और शाम करीब 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा. हालांकि, भारत में यह दृश्य नहीं होगा, लेकिन जिन देशों में यह दिखाई देगा, वहां भी समय भारतीय मानक समय के अनुसार ही माना जाएगा.

सूर्य ग्रहण में सूतक काल कब से लगता है?

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और घर में मौजूद देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता. सूतक काल में भोजन करना और भोजन पकाना वर्जित माना जाता है. हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए इन नियमों में कुछ छूट दी जाती है. मान्यता है कि खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी का पत्ता या थोड़ा सा गंगाजल डाल देने से दोष कम हो जाता है.

सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के धार्मिक या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और उन्हें घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए. हालांकि इस बार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और इन नियमों का पालन करना आवश्यक नहीं रहेगा.

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