Holi 2026 Date: होलिका दहन और होली की तारीख को लेकर इस साल लोगों के बीच काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कोई 2 मार्च कह रहा है तो कोई 3 मार्च. ऐसे में सही तिथि क्या है, यह जानना जरूरी हो जाता है. कई ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष होलिका पूजन और दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा. वहीं रंगों वाली होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी.
2 मार्च को पूर्णिमा तिथि कब से कब तक
पंचांग के अनुसार 2 मार्च को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर होगा. इस दिन चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी. इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी.
नक्षत्र कि बात करें तो सुबह 7 बजकर 24 मिनट तक आश्लेषा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र लग जाएगा. दिन में 12 बजकर 6 मिनट तक अतिगंड योग रहेगा, फिर सुकर्मा योग बनेगा. औदायिक योग सौम्य रहेगा. वहीं, 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी.
होलिका दहन रात में ही क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में और रात्रि काल में ही किया जाता है. दिन में होलिका जलाने की परंपरा नहीं है. यही कारण है कि 2 मार्च की शाम से पूर्णिमा शुरू होने के कारण होलिका दहन 2 मार्च की रात को ही किया जाएगा.
भद्रा का साया और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा का प्रभाव भी रहेगा. पंचांग के अनुसार 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से लेकर 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक भद्रा रहेगी. यानी पूरी रात भद्रा का समय रहेगा. शास्त्रों में भद्रा काल में शुभ कार्य करने की मनाही होती है. हालांकि यदि पूरी रात भद्रा हो, तो भद्रा के पुच्छ भाग में होलिका दहन करना शुभ माना जाता है.
इस साल भद्रा का पुच्छ भाग रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा. यही होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है. यानी 2 मार्च की रात 12.50 बजे से 2.02 बजे के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा. यह कुल 1 घंटा 12 मिनट का विशेष मुहूर्त है.
3 मार्च को क्या रहेगा खास?
3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम तक रहेगी. इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. कई लोग इस दिन गंगा स्नान कर दान-पुण्य करते हैं.
हालांकि, रंग खेलने की परंपरा इस दिन नहीं होगी. दरअसल 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है और यह भारत में दिखाई देगा. ग्रहण के कारण सूतक काल मान्य रहेगा, इसलिए इस दिन मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे.
4 मार्च को खेली जाएगी होली
रंगों वाली होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. इसी दिन लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर खुशियां बांटेंगे और होली का पर्व उत्साह के साथ मनाएंगे.
हर साल क्यों होता है तारीख को लेकर भ्रम?
होलिका दहन और होली की तारीख को लेकर लगभग हर साल असमंजस की स्थिति बनती है. इसकी वजह यह है कि त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से नहीं बल्कि हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं.
इस बार पूर्णिमा तिथि और चंद्र ग्रहण एक साथ पड़ने के कारण लोगों में ज्यादा कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है. लेकिन पंचांग के शास्त्रीय नियमों के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च की रात और रंगों वाली होली 4 मार्च को ही मनाई जाएगी.
होलिका दहन पर क्या करें और क्या न करें?
होलिका दहन से पहले विधि-विधान से पूजा करें. पूजा में नारियल, गुड़, गेहूं की बालियां और गुलाल अर्पित किया जाता है. होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने मन की नकारात्मकता और बुरी आदतों को त्यागने का संकल्प लें.
होलिका दहन के समय विवाद या कटु वचन से बचें. त्योहार को प्रेम, शांति और भाईचारे के साथ मनाना ही इसकी सच्ची भावना है.
