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CBSE का बड़ा फैसला : कक्षा 12 के लिए फिर शुरू होगी ऑन-स्क्रीन मार्किंग, डिजिटली चेक होंगी कॉपियां, बोर्ड ने बदला नियम

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Inlive247 Desk: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं कॉपी पर नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर चेक की जाएंगी. यह नई व्यवस्था 2026 बोर्ड परीक्षा से लागू होगी.इस सिस्टम को ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) नाम दिया गया है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि 2026 से 12वीं की कॉपियों का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल मोड में होगा.

क्या होगा फायदा?

अब तक मैन्युअल चेकिंग के दौरान कई बार नंबर जोड़ने में गलती या किसी सवाल के अंक छूट जाने जैसी समस्याएं सामने आती थीं. लेकिन नए डिजिटल सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही अंक जोड़ने और रिकॉर्ड रखने का काम करेगा. सीबीएसई का कहना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और गलती की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी. सबसे बड़ी राहत यह होगी कि रिजल्ट समय पर जारी किया जा सकेगा.

10वीं के छात्रों के लिए क्या बदला?

फिलहाल 10वीं के छात्रों के लिए पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी. यानी 2026 में 10वीं की कॉपियां पहले की तरह मैन्युअल तरीके से ही जांची जाएंगी. हालांकि 10वीं को लेकर भी एक बड़ा अपडेट सामने आया है.

साल में दो बार होगी 10वीं की बोर्ड परीक्षा

सीबीएसई अब 10वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करेगा. इस साल पहली परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होकर 10 अप्रैल तक चलेगी. दूसरी परीक्षा 15 मई से 1 जून के बीच होगी. ध्यान देने वाली बात यह है कि 17 फरवरी से शुरू होने वाली पहली परीक्षा में बैठना सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगा. दोनों परीक्षाओं का सिलेबस एक जैसा रहेगा.

स्कूलों को तैयारी के निर्देश

नए डिजिटल सिस्टम को लागू करने के लिए बोर्ड ने स्कूलों को पहले से तैयारी करने को कहा है. स्कूलों में मजबूत इंटरनेट कनेक्शन, विंडोज 8 या उससे ऊपर के लैपटॉप/कंप्यूटर और बिजली का बैकअप होना जरूरी होगा. सीबीएसई टीचर्स को इस सिस्टम की ट्रेनिंग भी देगा और पहले ट्रायल रन कराए जाएंगे, ताकि बाद में किसी तरह की तकनीकी दिक्कत न आए.

इस बदलाव से क्या-क्या बदलेगा?

कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम से मार्किंग में गलती की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी.

टीचर्स अपने ही स्कूल से कॉपियां चेक कर सकेंगे, उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

कॉपियां तेजी से चेक होंगी, जिससे रिजल्ट समय पर जारी होगा.

डिजिटल चेकिंग के बाद दोबारा नंबर वेरिफिकेशन की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.

कुल मिलाकर, सीबीएसई का यह कदम परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

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