लेबर कोड के खिलाफ पतरातू में मजदूरों का हंगामा, पावर प्लांट का काम ठप
झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में बुधवार को हजारों मजदूरों ने केंद्र सरकार के नए लेबर कोड के खिलाफ व्यापक हड़ताल की. इस विरोध का असर पीवीयूएनएल के निर्माणाधीन पावर प्लांट पर साफ तौर पर देखने को मिला, जहां काम पूरी तरह ठप हो गया. मजदूरों ने इस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की.
सरकार और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
हड़ताल के दौरान मजदूरों ने केंद्र सरकार और प्लांट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना था कि नए लेबर कोड उनके अधिकारों को कमजोर करते हैं और इससे उनकी नौकरी की सुरक्षा पर असर पड़ेगा. मजदूरों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सामने रखा और इन कानूनों में बदलाव की मांग की.
पुलिस की निगरानी में शांतिपूर्ण हड़ताल
स्थिति को देखते हुए पतरातू पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी. पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सतर्कता बरती और प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने की अपील की.
यूनियन का मिला पूरा समर्थन
इस हड़ताल को एनटीपीसी मजदूर यूनियन (एटक) का समर्थन मिला. यूनियन के नेता मनोज कुमार महतो ने कहा कि संगठन हमेशा मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ता रहा है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है.
शोषण और कम वेतन के आरोप
मजदूरों ने भेल से जुड़ी कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि उनसे रोजाना 12 घंटे तक काम कराया जाता है, जबकि बदले में उन्हें मात्र 15 से 16 हजार रुपये वेतन मिलता है. साथ ही, कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की कमी भी बताई गई, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है.
ठेकेदारों पर भी उठे सवाल
मजदूरों ने एजेंसियों और ठेकेदारों पर दुर्व्यवहार और वेतन भुगतान में अनियमितता के आरोप लगाए. उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा.
चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा उग्र आंदोलन
मजदूर यूनियन ने पीवीयूएनएल प्रबंधन से जल्द से जल्द समस्याओं के समाधान की मांग की है. यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी.

