मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की मूर्ति रखना शुभ है या अशुभ? इन 3 बातों का रखें खास ध्यान
Vastu Tips: वास्तुशास्त्र में घर के हर हिस्से का खास महत्व बताया गया है, लेकिन मुख्य द्वार को सबसे अहम माना जाता है. वास्तु के अनुसार मेन डोर सिर्फ घर में प्रवेश का रास्ता नहीं होता, बल्कि यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी होता है. ऐसे में मुख्य द्वार की दिशा, साफ-सफाई और वहां रखा डेकोर सीधे तौर पर घर की सुख-शांति और माहौल को प्रभावित करता है. कई बार लोग सजावट के नाम पर बिना वास्तु सोचे-समझे चीजें रख देते हैं, जो आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती हैं.
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, अगर मुख्य द्वार पर गलत चीजें रख दी जाएं, तो इससे मानसिक तनाव और अशांति बढ़ सकती है. अक्सर लोग मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर लगा देते हैं, लेकिन क्या यह वास्तु के लिहाज से सही है? आइए जानते हैं.
क्या मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति लगाना शुभ है?
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और हर शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाती है. लेकिन वास्तुशास्त्र के अनुसार गणेश जी की मूर्ति को घर के मुख्य द्वार के बाहर लगाना उचित नहीं माना जाता. कई लोग दरवाजे के ऊपर बाहर की तरफ गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति लगाते हैं. वास्तु मान्यता के मुताबिक भगवान गणेश की पीठ की ओर दरिद्रता और मुख की ओर रिद्धि-सिद्धि का वास माना जाता है. ऐसे में जब मूर्ति बाहर की ओर होती है, तो नकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश कर सकती है और सकारात्मक ऊर्जा बाहर की ओर चली जाती है. इसलिए गणेश जी की मूर्ति को घर के अंदर, पूजा स्थल या शुभ स्थान पर लगाना बेहतर माना जाता है.
मुख्य द्वार से जुड़े 3 जरूरी वास्तु नियम
- वास्तुशास्त्र के अनुसार सुबह और शाम मुख्य द्वार पर हल्का पानी छिड़कना शुभ माना जाता है. इससे वातावरण शुद्ध रहता है और मन को शांति मिलती है.
- मुख्य द्वार की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. शाम के समय यहां एक दीया जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता बनी रहती है.
- वास्तु नियमों के अनुसार मुख्य द्वार मजबूत और सही स्थिति में होना चाहिए. दरवाजे में किसी तरह की दरार, टूट-फूट या छेद नहीं होना चाहिए. साथ ही मेन डोर को लंबे समय तक खुला छोड़ने से भी बचना चाहिए.

