सरहुल पर झारखंड में गूंजा ‘जोहार’, CM हेमंत सोरेन ने सरना स्थल पर की पूजा, राज्यवासियों को दी शुभकामनाएं
रांची: प्रकृति और परंपरा के महापर्व सरहुल के मौके पर झारखंड की राजधानी में आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की खुशहाली की कामना की. सरना स्थल पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच हुए इस अनुष्ठान ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया.
सरहुल प्रकृति और मानव जीवन के गहरे रिश्ते का प्रतीक- सीएम
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को सरहुल की शुभकामनाएं देते हुए कहा, कि यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के गहरे रिश्ते का प्रतीक है. उन्होंने अपने संदेश में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि संतुलित सह-अस्तित्व ही भविष्य की समृद्धि और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करता है. मुख्यमंत्री ने कामना की कि सरहुल का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए.
बता दें, मुख्यमंत्री को इस विशेष अवसर पर सरना स्थल में आयोजित पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहले ही आमंत्रित किया गया था. रांची केंद्रीय सरना समिति के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर 21 मार्च को होने वाले मुख्य आयोजन में शामिल होने का आग्रह किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
सरहुल पर्व प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक- बाबूलाल मरांडी
इधर, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने भी सरहुल के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है, जो हमें धरती और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है. उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह पर्व सभी के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लेकर आए.
सरहुल के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व प्रकृति, संस्कृति और आदिवासी परंपराओं का अद्भुत संगम है, जो हमें धरती, जल, जंगल और जीवन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) March 21, 2026
ईश्वर से प्रार्थना है कि सरहुल आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर… pic.twitter.com/gNpVqtkOta
सरहुल का पर्व हर साल झारखंड में प्रकृति के नवजीवन का स्वागत करता है. साल वृक्ष की पूजा और प्रकृति के प्रति आस्था का यह उत्सव सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती देता है.

