Chaitra Chhath 2026: चैती छठ आज से शुरू, जानिए इस कठिन व्रत का महत्व और कथा
Chaitra Chhath 2026: चैती छठ हिंदू परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और कठिन व्रत है, जिसकी शुरुआत इस वर्ष 22 मार्च 2026 से नहाय-खाय के साथ हो चुकी है. यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित है, जिसमें शुद्धता, संयम और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है. छठ व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती कठोर नियमों का पालन करते हैं और उगते व डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर जीवन में संतुलन और ऊर्जा की कामना करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन के दुखों को कम करता है और सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है. यही वजह है कि इसे सबसे फलदायी व्रतों में गिना जाता है.
छठ व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
छठ पर्व की खास बात इसकी सादगी और पवित्रता है. इसमें किसी भव्य आयोजन या दिखावे की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि शुद्ध मन और अनुशासन सबसे अहम होते हैं. यह पर्व हमें सूर्य जैसे ऊर्जा स्रोत के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाता है. साथ ही, यह संदेश देता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने से ही जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है. व्रती इस दौरान सात्विक आहार लेते हैं, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं और पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं. इससे मानसिक शांति के साथ-साथ आत्मिक बल भी प्राप्त होता है.
पौराणिक कथा: जब द्रौपदी ने रखा छठ व्रत
छठ पर्व की महिमा का वर्णन महाभारत काल से जुड़ी कथाओं में भी मिलता है. कहा जाता है कि जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हारकर वनवास में थे, तब वे गहरे संकट और अभाव से जूझ रहे थे. वनवास के दौरान एक समय ऐसा आया जब उनके आश्रम में कई ऋषि-मुनि पधारे. उनके सत्कार और भोजन की व्यवस्था को लेकर युधिष्ठिर बेहद चिंतित हो गए.
अपने पतियों की परेशानी देखकर माता द्रौपदी व्याकुल हो उठीं. उन्होंने अपने गुरु धौम्य से समाधान मांगा. तब गुरु ने उन्हें सूर्य देव की उपासना और ‘रवि षष्ठी व्रत’ करने का मार्ग बताया. द्रौपदी ने पूरी निष्ठा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन किया. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने पांडवों को अक्षय पात्र का वरदान दिया, जिससे भोजन की कमी हमेशा के लिए समाप्त हो गई.
इतना ही नहीं, इस व्रत के पुण्य प्रभाव से पांडवों ने आगे चलकर अपना खोया हुआ राज्य और सम्मान भी पुनः प्राप्त किया.

