झारखंड निकाय चुनाव: तीन बच्चों का नियम बना सियासी सिरदर्द, कई दावेदार हो सकते हैं बाहर

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inlive247 Desk : झारखंड निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. लंबे इंतजार के बाद अब चुनाव की आहट साफ सुनाई देने लगी है. सत्ताधारी दल हो या विपक्ष, सभी अपनी-अपनी रणनीति में जुट गए हैं. इसी बीच झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने कुछ अहम गाइडलाइन जारी की हैं, जो इस बार कई उम्मीदवारों की राह मुश्किल कर सकती हैं.

जानकारी के मुताबिक, नगर निगम बोर्ड की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने वाले सदस्य अब दोबारा निगम का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. यही नहीं, 9 अक्टूबर 2013 के बाद यदि किसी उम्मीदवार का तीसरा बच्चा हुआ है, तो वह भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा. हालांकि, अगर तीसरा बच्चा जीवित नहीं है, तो ऐसे उम्मीदवार पर यह नियम लागू नहीं होगा.

सरकारी बकाया वालों पर भी सख्ती: झारखंड निकाय चुनाव

चुनाव लड़ने के लिए उम्र से जुड़ी शर्तें भी तय की गई हैं. वार्ड पार्षद बनने के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए, जबकि मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की उम्र नामांकन के समय कम से कम 30 वर्ष होनी जरूरी है. कोई भी वार्ड पार्षद प्रत्याशी एक से ज्यादा वार्ड से नामांकन नहीं कर सकेगा.

केंद्र या राज्य सरकार के किसी लाभ के पद पर कार्यरत व्यक्ति नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. वहीं, अगर कोई प्रत्याशी किसी आपराधिक मामले में 6 महीने से ज्यादा समय से फरार है, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द मानी जाएगी. कोर्ट द्वारा किसी मामले में 6 साल की सजा पाए और जिसकी सजा अवधि पूरी नहीं हुई है, वह भी चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेगा.

इसके अलावा, किसी भी सरकारी संस्था का बकाया रखने वाले, दिवालिया घोषित व्यक्ति या मानसिक रूप से अस्वस्थ उम्मीदवार भी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होंगे. खास बात यह है कि इस बार नगर निकाय चुनाव 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएंगे. इसमें न तो कोई नया नाम जोड़ा जाएगा और न ही कोई नाम हटाया जाएगा.

तीन बच्चों का नियम बना चर्चा का विषय

देखें तो नगर निकाय चुनाव के उम्मीदवार तीन बच्चों के नियम से कई दावेदार प्रभावित हो सकते हैं. धनबाद नगर निगम की मेयर सीट इस बार सामान्य वर्ग के लिए घोषित की गई है, जिसके चलते उम्मीदवारों की लंबी कतार देखने को मिल रही है. शहर में अभी से होर्डिंग और पोस्टर लगने लगे हैं.

कारोबार से जुड़े लोग हों या किसी अन्य पेशे से, कई चेहरे खुद को समाजसेवी बताकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. समाजसेवी बनने की जैसे होड़ मच गई है. अब देखना दिलचस्प होगा कि नामांकन के वक्त मेयर पद के लिए कितने दावेदार सामने आते हैं. जो भी हो, इस बार मेयर की कुर्सी के लिए मुकाबला काफी रोचक होने वाला है. चर्चा है कि बाहुबली परिवार भी चुनावी रण में उतर सकता है, जिससे सियासी पारा और चढ़ना तय माना जा रहा है.

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