धोनी को झारखंड आवास बोर्ड का नोटिस, हरमू स्थित प्लॉट के उपयोग पर उठे सवाल

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क्रिकेट की दुनिया में शांत स्वभाव और सटीक फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी इस बार किसी मैच या रिकॉर्ड की वजह से नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक नोटिस को लेकर चर्चा में हैं. रांची के हरमू इलाके में स्थित उनके आवासीय प्लॉट के उपयोग को लेकर झारखंड राज्य आवास बोर्ड ने सवाल खड़े किए हैं. आरोप है कि जिस जमीन को रहने के लिए आवंटित किया गया था, वहां व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है. अब यह मामला खेल जगत और प्रशासनिक हलकों दोनों में चर्चा का विषय बन गया है.

क्या है पूरा मामला?

आवास बोर्ड के अनुसार, धोनी को हरमू क्षेत्र में प्लॉट संख्या एच 10ए आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था. लेकिन हाल ही में यह जानकारी सामने आई कि उस स्थान पर एक पैथोलॉजी लैब का संचालन हो रहा है. बोर्ड का मानना है कि यह नियमों के खिलाफ है, क्योंकि आवासीय जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता.

सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड ने नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो प्लॉट का आवंटन रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है.

बोर्ड की सख्ती और बढ़ती कार्रवाई

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में आवास बोर्ड ने ऐसे कई मामलों की समीक्षा शुरू की है, जहां आवासीय भूखंडों का उपयोग व्यवसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं. इसी क्रम में यह कार्रवाई भी की गई है.

तारीफों के बीच नोटिस

दिलचस्प बात यह है कि यह नोटिस ऐसे समय में सामने आया है, जब इसी महीने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सार्वजनिक मंच से धोनी की सराहना की थी. लोहरदगा के बीएस कॉलेज मैदान में आयोजित बलदेव साहू मेमोरियल टी 20 क्रिकेट टूर्नामेंट के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा था, कि महेंद्र सिंह धोनी ने विश्व क्रिकेट में झारखंड का नाम रोशन किया है.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था, कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और बेहतर खेल नीति के माध्यम से युवाओं को अवसर देने की दिशा में काम कर रही है.

अब आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि धोनी या उनके प्रतिनिधि इस नोटिस पर क्या जवाब देते हैं. यदि बोर्ड को संतोषजनक स्पष्टीकरण मिलता है, तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है, अन्यथा आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. फिलहाल यह मामला प्रशासनिक नियमों और एक बड़े नाम से जुड़ने के कारण चर्चा में बना हुआ है.

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