बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, CJI बोले–मिसयूज़ की आशंका, पढ़ें सुनवाई की अहम टिप्पणी

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Desk: UGC विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए नए नियमों पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट में आज यूजीसी (UGC) के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच के सामने आया. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया कि नए नियमों का सेक्शन 3C जाति आधारित भेदभाव को केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग तक सीमित करता है, जबकि सामान्य वर्ग को इससे बाहर रखा गया है.

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि भेदभाव की ऐसी परिभाषा न सिर्फ संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों से भी मेल नहीं खाती. उनका यह भी कहना था कि इस तरह के नियम समाज में एकता के बजाय वैमनस्य को बढ़ावा दे सकते हैं.

सुनवाई के दौरान रैगिंग से जुड़े मामलों में इन नियमों के संभावित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठा. इस पर अदालत ने सवाल खड़े किए और नियमों के व्यावहारिक असर को लेकर चिंता जताई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी अगर समाज जाति से मुक्त नहीं हो पाया है, तो यह सोचने की जरूरत है कि क्या ऐसे नए नियम हमें आगे ले जा रहे हैं या पीछे की ओर धकेल रहे हैं.

वहीं, जस्टिस ज्योमाल्या बागची ने सामाजिक न्याय से जुड़े कानूनों में संतुलन बनाए रखने और दुरुपयोग रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने संकेत दिया कि अच्छे इरादों वाले कानून भी अगर संतुलित न हों, तो समस्याएं पैदा कर सकते हैं.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यूजीसी के इन नियमों पर तत्काल रोक लगाने और उन्हें रद्द करने की मांग की. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया और संकेत दिया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर कानून विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर गहन विचार किया जाना चाहिए. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में कोर्ट क्या रुख अपनाता है.

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